गणित को सबसे कठिन माना जाता है लेकिन एक ताजा शोध में पता चला है कि गणित के सूत्र में मौजूद अंकों और अक्षरों का जटिल सिलसिला मस्तिष्क में आनंद की सबसे ज्यादा अनुभूति पैदा करता है।

 

बीजगणित, त्रिकोणमिति, अनुपात, सर्किल, पायथागोरस प्रमेय, रैखिक समीकरण, ज्यामिति क्षेत्र आदि सभी अक्सर छात्रों के सामने विभिन्न राक्षसों के रूप में सामने आते हैं और उन्हें डराते हैं। गणित को सीखने का डर इस स्तर तक पहुंच गया है कि छात्र अब विषय का नाम सुनते ही बिदग जाते हैं यानी सीखना ही नहीं चाहते हैं। हालांकि, इस समस्या से निजात पाने के लिए वल्र्ड वाइड वेब बचाव के रूप में सामने आया है। उसने सभी विषयों के राजा गणित को समझने के लिए छात्रों को इसे सरल तरीके से लेकिन प्रभावी स्ट्रैजी के साथ अपनाने में मदद की है।

गणित का भय आज से नहीं बल्कि प्राचीन काल से ही छात्रों का पीछा करता आया है और विशेष रूप से उन लोगों का जो गणना करने में स्वाभाविक रूप से कमजोर होते हैं। कभी-कभी यह चिंता का विषय बन जाता है, कभी-कभी तो यह छात्रों के बीच व्यवहार संबंधी समस्याएं भी पैदा करता है। इसलिए, शिक्षकों और समाज का यह दायित्व हो जाता है कि गणित के डर से लड़ने में इन छात्रों की मदद करें।

अक्सर यह देखा जाता है कि गणित पढ़ाने के दौरान शिक्षकों को तमाम तरह की समस्याएं आती हैं। इसके कई कारण हो सकते हैं जैसे संसाधनों की कमी, छात्रों के बीच गणित के प्रति रुचि में कमी, कक्षा में बच्चों की संख्या और उनकी पसंद आदि। ब्रिटिश काउंसिल द्वारा किए गए एक अध्ययन के मुताबिक, गणित की चिंता ही इस विषय में छात्र के खराब प्रदर्शन का प्रमुख कारण होती है, जो तत्पश्चात इस विषय को और अधिक कठिन बना देती है।

गणित को सीखना आसान बना दिया

छात्रों में इस विषय को दिलचस्प बनाने हेतु विभिन्न अभिनव रणनीतियों को सर्च करना शिक्षकों के लिए जरूरी हो है ताकि इस विषय के प्रति छात्रों में बैठा डर प्यार में बदल जाए। कैंडी अमाया का एक ब्लॉग है जिसका नाम है स्कूलोजी एक्सचेंज जिसमें इंडोनेशियाई गणित शिक्षक की रोचक कथा का बड़ा ही रोचक वर्णन किया गया है, जिसने अपने छात्रों के लिए इस विषय को दिलचस्प बना दिया। उन्होंने गणित को पढ़ाने में सोशल मीडिया का इस्तेमाल किया और इससे इस विषय के डर से छुटकारा पाने में मदद मिली। उन्होंने गणित और उसके उपयोगकर्ता के अनुकूल मोबाइल ऐप का उपयोग गणित को अपने छात्रों के लिए अधिक अनुकूल बनाने के लिए किया।

यह इस अर्थ में अद्वितीय था कि उन्होंने इंटरनेट का उपयोग करके इसके विभिन्न मॉड्यूल तैयार किए। उन्होंने इंटरनेट पर विशेष रूप से डिजाइन किए गए असाइनमेंट, क्विज और समीकरण अपलोड किए और छात्रों को परंपरागत कलम और पेंसिल मोड की बजाय ऑनलाइन मोड का उपयोग करके सवालों को हल करना सिखाया।

भारत में भी, कई शिक्षक गणित को दिलचस्प बनाने के लिए अभिनव रणनीतियों को अपना रहे हैं। दिल्ली में कैम्ब्रिज स्कूल के एक शिक्षक प्रेरणा ढिंग्रा ने अपने छात्रों के लिए अपने कक्षा में प्रश्नोत्तरी आयोजित करके विषय को और अधिक रोचक बना दिया है। इसने न केवल अपने छात्रों को कठिन सूत्रों को सीखने में मदद की है बल्कि उन छात्रों के बीच गहरी दिलचस्पी भी पैदा की है जिन्होंने एक बार इस विषय से नफरत की थी। ष्हर छात्र के लिए गणित दिलचस्प बनाना एक कठिन काम है। मैंने अपने छात्रों के बीच गणित के डर से लड़ने के तरीके पर बहुत सारे शोध किए हैं। मैंने विषय को उनके लिए विषय अधिक दिलचस्प बनाने के लिए एक मॉड्यूल बनाया है। प्रेरणा ने कहा, एक सीखने की व्यवस्था की जानी चाहिए जो छात्रों की क्षमताओं को बढ़ाने में समस्याओं को हल करने पर जोर देती है।

क्यूमैथ एक ऐसा प्लेटफाॅर्म है जो छात्रों को इसके डर से लड़ने में मदद करता है। क्यूमैथ दावा करता है कि यह स्कूल का एक गणित उत्कृष्टता कार्यक्रम है जो बच्चों को अवधारणा, योग्यता और तर्क के गणित के बारे में बताकर छात्रों में गणित विषय की एक मजबूत नींव बनाने में मदद करता है। संयुक्त राज्य अमेरिका, ब्रिटेन और सिंगापुर द्वारा उपयोग किए जाने वाले पाठ्यक्रम के साथ-साथ विभिन्न भारतीय स्कूल बोर्डों द्वारा अपनाई जाने वाली सीखने के मानकों के अनुसार अपना पाठ्यक्रम विकसित करने के बाद, क्यूमैथ ने विशिष्ट रूप से डिजाइन की गई कार्य पुस्तिकाएं पेश की हैं जो छात्रों को स्वतंत्र रूप से समस्याओं को जानने और उन्हें हल करने में सहायता कर सक्रिय शिक्षा को प्रोत्साहित करती हैं।

गणित के टैब-आधारित अभ्यास अभ्यास परिस्थितियों का मूल्यांकन करके और प्रदान की गई जानकारी से निष्कर्ष निकालने और समस्याओं को हल करने के लिए बच्चों की क्षमताओं को बढ़ाते हैं। ये अभ्यास बच्चों में सटीकता और प्रवीणता बढ़ाने में भी मदद करते हैं।
क्यूमैथ के सीईओ मानन खुर्मा का कहना है, ‘इनोवेशन समीकरण का सिर्फ एक हिस्सा है। बच्चों को अपने जीवन में स्मार्ट और तार्किक निर्णय लेने की भी आवश्यकता होती है, यही कारण है कि हमें अपने बच्चों के बीच गणित की एक मजबूत नींव का निर्माण करना महत्वपूर्ण है। मुझे एहसास हुआ है कि गणित को पढ़ाने में पारंपरिक दृष्टिकोण बच्चों को इस विषय को समझने का प्र्याप्त स्पेस नहीं दे रहा है। इसके बजाए, अधिकांश बच्चों में इसको लेकर डर बढ़ता ही जा रहा है, जो कि निराशाजनक बात है। इसलिए, मैं बच्चों की मदद करने के लिए और उन्हें बताने के लिए एक रास्ता खोजना चाहता था जिसके माध्यम से उन्हें पता चल सके कि हमारे जीवन के हर पहलू में गणित कैसे प्रचलित है। यही कारण है कि मैंने क्यूमैथ शुरू किया। यह गणित को एक जीवन के कौशल के रूप में मानता है जो छात्रों को हमेशा-बदलने वाली दुनिया के माध्यम से नेविगेट करने में मदद करता है।’

बख्तावर कृष्णन

इंस्पेरस शिक्षा के संस्थापक और निदेशक बख्तावर कृष्णन ने गणित को आसान बनाने के लिए एक रोचकपूर्ण उपाय किया। वह कहते हैं, ‘गणित में जीवन के अधिकतम अनुप्रयोग हैं। मूलरूप से, इसे अधिक दिलचस्प बनाने के लिए दैनिक अनुप्रयोगों से संबंधित होना चाहिए। जब आप बाजार से कोई वस्तु खरीदने जाते हैं, तो आप वहां प्रतिशत और लाभ व हानि की अवधारणा का उपयोग कर सकते हैं। जब क्रिकेट के पहले दो कप्तान टॉस के लिए जाते हैं, तो वहां प्रायिकता की अवधारणा को पढ़ाया जा सकता है।’

छात्र बोलते हैं

हंसराज स्कूल के छात्र मेहर खिलवानी बताते हैं कि रैखिक समीकरण, बीजगणित, प्रतिशत, गणित, त्रिकोणमिति और ज्यामिति आदि हमारे लिए राक्षसों की तरह थे। जब तक हमें गणित से मुकाबला करने का कोई रास्ता नहीं मिला, तब तक हम गणित विषय से नफरत करते रहे। मैं गणित से अब भी बहुत नफरत करता हूं। यह मेरे लिए कभी आसान विषय नहीं रहा। मुझे उस समय तक सरल रैखिक समीकरणों या गणित की किसी अन्य समस्याओं को समझने के लिए जूझना पड़ा जब तक कि मेरे शिक्षक ने मुझे इससे मुकाबला करने का समाधान नहीं दिया। उन्होंने मुझे इंटरनेट पर इस विषय का अध्ययन करने के विभिन्न तरीकों की खोजने की सलाह दी। मैंने वही किया और उनकी मदद से मुझे धीरे-धीरे गणित विषय अच्छा लगने लगा। मेरे शिक्षक ने मेरे लिए कुछ असाइनमेंट तैयार किए जिन्होंने वास्तव में हमारी मदद की। अब, मैं गणित के अध्ययन में पहले से अधिक आत्मविश्वास महसूस करता हूं।

देव समाज आधुनिक विद्यालय के छात्र देव मदान, गणित पर विशेष रूप से फोकस करते हैं। उन्होंने विषय को समझने के कई तरीकों का प्रयोग किया है और उन्हें बताया कि www-meritnation-com नामक मंच ने वास्तव में उसकी मदद की है। उन्होंने बताया, ‘इंटरनेट पर आरएंडडी के दौरान मुझे  meritnation.com वेबसाइट के बारे में मालूम हुआ जिसमें गणित की समस्याओं को हल करने के अनूठक तरीके दिये गये हैं। इस मंच पर कोई भी किसी से सवाल पूछ सकता है और उनका समाधान ढूंढ सकता है। इतना ही नहीं, गणित के भय से निपटने के लिए संगीत ने भी मेरे लिए एक महान चिकित्सक की भूमिका निभाई। अब, विषय का अध्ययन करते समय या अभ्यास करते समय, मैं हमेशा संगीत सुनता हूं, जो मुझे ध्यान केंद्रित करने में मदद करता है।’

सरकारी हस्तक्षेप

सरकार भी गणित के लिए डर को कम करने में अपनी उचित भूमिका निभा रही है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एमएचआरडी) ने छात्रों के बीच गणित के डर को कम करने के लिए एक समिति गठित की है। गुजरात शिक्षा मंत्री भूपेंद्रसिंह की अध्यक्षता में, समिति गणित के शिक्षण को आसान बनाने के तरीकों का सुझाव देगी।

मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने राष्ट्रीय शैक्षणिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की वार्षिक बैठक में घोषणा की थी कि इस समिति को बनाने का निर्णय राष्ट्रीय आकलन सर्वेक्षण के आधार पर छात्रों के गणित के भय को खत्म करने के लिए लिया गया था। उन्होंने कहा कि प्रतिष्ठित शिक्षाविद और वरिष्ठ अधिकारी इस समिति के कुछ हिस्से हैं।

उन्होंने यह भी बताया, ‘तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री कद्याम श्रीहरि की अध्यक्षता में एक अन्य समिति की स्थापना की जाएगी, ताकि सेवा शिक्षकों के प्रशिक्षण को सुदृढ़ और मजबूत किया जा सके। दोनों समितियां अपनी रिपोर्ट तीन महीने के भीतर जमा कर देगी।’

#गणितकाभय     #गणित

 

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<strong><span style=”color: #333333;” data-mce-style=”color: #333333;”><em>गणित को सबसे कठिन माना जाता है लेकिन एक ताजा शोध में पता चला है कि गणित के सूत्र में मौजूद अंकों और अक्षरों का जटिल सिलसिला मस्तिष्क में आनंद की सबसे ज्यादा अनुभूति पैदा करता है।</em></span></strong><br /><span style=”color: #000000;” data-mce-style=”color: #000000;”>बीजगणित, त्रिकोणमिति, अनुपात, सर्किल, पायथागोरस प्रमेय, रैखिक समीकरण, ज्यामिति क्षेत्र आदि सभी अक्सर छात्रों के सामने विभिन्न राक्षसों के रूप में सामने आते हैं और उन्हें डराते हैं। गणित को सीखने का डर इस स्तर तक पहुंच गया है कि छात्र अब विषय का नाम सुनते ही बिदग जाते हैं यानी सीखना ही नहीं चाहते हैं। हालांकि, इस समस्या से निजात पाने के लिए वल्र्ड वाइड वेब बचाव के रूप में सामने आया है। उसने सभी विषयों के राजा गणित को समझने के लिए छात्रों को इसे सरल तरीके से लेकिन प्रभावी स्ट्रैजी के साथ अपनाने में मदद की है।</span><span style=”color: #000000;” data-mce-style=”color: #000000;”><img class=”alignleft wp-image-7407″ src=”http://hindi.edinbox.com/wp-content/uploads/2018/05/blackboard-board-chalk-714699-1-450×300.jpg” alt=”” width=”308″ height=”205″ data-mce-src=”http://hindi.edinbox.com/wp-content/uploads/2018/05/blackboard-board-chalk-714699-1-450×300.jpg” />गणित का भय आज से नहीं बल्कि प्राचीन काल से ही छात्रों का पीछा करता आया है और विशेष रूप से उन लोगों का जो गणना करने में स्वाभाविक रूप से कमजोर होते हैं। कभी-कभी यह चिंता का विषय बन जाता है, कभी-कभी तो यह छात्रों के बीच व्यवहार संबंधी समस्याएं भी पैदा करता है। इसलिए, शिक्षकों और समाज का यह दायित्व हो जाता है कि गणित के डर से लड़ने में इन छात्रों की मदद करें।</span><span style=”color: #000000;” data-mce-style=”color: #000000;”>अक्सर यह देखा जाता है कि गणित पढ़ाने के दौरान शिक्षकों को तमाम तरह की समस्याएं आती हैं। इसके कई कारण हो सकते हैं जैसे संसाधनों की कमी, छात्रों के बीच गणित के प्रति रुचि में कमी, कक्षा में बच्चों की संख्या और उनकी पसंद आदि। ब्रिटिश काउंसिल द्वारा किए गए एक अध्ययन के मुताबिक, गणित की चिंता ही इस विषय में छात्र के खराब प्रदर्शन का प्रमुख कारण होती है, जो तत्पश्चात इस विषय को और अधिक कठिन बना देती है।</span><span style=”color: #003366;” data-mce-style=”color: #003366;”><strong>गणित को सीखना आसान बना दिया</strong></span><span style=”color: #000000;” data-mce-style=”color: #000000;”>छात्रों में इस विषय को दिलचस्प बनाने हेतु विभिन्न अभिनव रणनीतियों को सर्च करना शिक्षकों के लिए जरूरी हो है ताकि इस विषय के प्रति छात्रों में बैठा डर प्यार में बदल जाए। कैंडी अमाया का एक ब्लॉग है जिसका नाम है स्कूलोजी एक्सचेंज जिसमें इंडोनेशियाई गणित शिक्षक की रोचक कथा का बड़ा ही रोचक वर्णन किया गया है, जिसने अपने छात्रों के लिए इस विषय को दिलचस्प बना दिया। उन्होंने गणित को पढ़ाने में सोशल मीडिया का इस्तेमाल किया और इससे इस विषय के डर से छुटकारा पाने में मदद मिली। उन्होंने गणित और उसके उपयोगकर्ता के अनुकूल मोबाइल ऐप का उपयोग गणित को अपने छात्रों के लिए अधिक अनुकूल बनाने के लिए किया। </span><span style=”color: #000000;” data-mce-style=”color: #000000;”>यह इस अर्थ में अद्वितीय था कि उन्होंने इंटरनेट का उपयोग करके इसके विभिन्न मॉड्यूल तैयार किए। उन्होंने इंटरनेट पर विशेष रूप से डिजाइन किए गए असाइनमेंट, क्विज और समीकरण अपलोड किए और छात्रों को परंपरागत कलम और पेंसिल मोड की बजाय ऑनलाइन मोड का उपयोग करके सवालों को हल करना सिखाया। </span><span style=”color: #000000;” data-mce-style=”color: #000000;”><img class=”wp-image-7409 alignright” src=”http://hindi.edinbox.com/wp-content/uploads/2018/05/book-education-graphing-paper-167682-450×300-1-450×300.jpg” alt=”” width=”282″ height=”188″ data-mce-src=”http://hindi.edinbox.com/wp-content/uploads/2018/05/book-education-graphing-paper-167682-450×300-1-450×300.jpg” />भारत में भी, कई शिक्षक गणित को दिलचस्प बनाने के लिए अभिनव रणनीतियों को अपना रहे हैं। दिल्ली में कैम्ब्रिज स्कूल के एक शिक्षक प्रेरणा ढिंग्रा ने अपने छात्रों के लिए अपने कक्षा में प्रश्नोत्तरी आयोजित करके विषय को और अधिक रोचक बना दिया है। इसने न केवल अपने छात्रों को कठिन सूत्रों को सीखने में मदद की है बल्कि उन छात्रों के बीच गहरी दिलचस्पी भी पैदा की है जिन्होंने एक बार इस विषय से नफरत की थी। ष्हर छात्र के लिए गणित दिलचस्प बनाना एक कठिन काम है। मैंने अपने छात्रों के बीच गणित के डर से लड़ने के तरीके पर बहुत सारे शोध किए हैं। मैंने विषय को उनके लिए विषय अधिक दिलचस्प बनाने के लिए एक मॉड्यूल बनाया है। प्रेरणा ने कहा, एक सीखने की व्यवस्था की जानी चाहिए जो छात्रों की क्षमताओं को बढ़ाने में समस्याओं को हल करने पर जोर देती है।</span><span style=”color: #000000;” data-mce-style=”color: #000000;”>क्यूमैथ एक ऐसा प्लेटफाॅर्म है जो छात्रों को इसके डर से लड़ने में मदद करता है। क्यूमैथ दावा करता है कि यह स्कूल का एक गणित उत्कृष्टता कार्यक्रम है जो बच्चों को अवधारणा, योग्यता और तर्क के गणित के बारे में बताकर छात्रों में गणित विषय की एक मजबूत नींव बनाने में मदद करता है। संयुक्त राज्य अमेरिका, ब्रिटेन और सिंगापुर द्वारा उपयोग किए जाने वाले पाठ्यक्रम के साथ-साथ विभिन्न भारतीय स्कूल बोर्डों द्वारा अपनाई जाने वाली सीखने के मानकों के अनुसार अपना पाठ्यक्रम विकसित करने के बाद, क्यूमैथ ने विशिष्ट रूप से डिजाइन की गई कार्य पुस्तिकाएं पेश की हैं जो छात्रों को स्वतंत्र रूप से समस्याओं को जानने और उन्हें हल करने में सहायता कर सक्रिय शिक्षा को प्रोत्साहित करती हैं।</span><span style=”color: #000000;” data-mce-style=”color: #000000;”>गणित के टैब-आधारित अभ्यास अभ्यास परिस्थितियों का मूल्यांकन करके और प्रदान की गई जानकारी से निष्कर्ष निकालने और समस्याओं को हल करने के लिए बच्चों की क्षमताओं को बढ़ाते हैं। ये अभ्यास बच्चों में सटीकता और प्रवीणता बढ़ाने में भी मदद करते हैं। </span><br />
<span style=”color: #000000;” data-mce-style=”color: #000000;”>क्यूमैथ के सीईओ मानन खुर्मा का कहना है, ‘इनोवेशन समीकरण का सिर्फ एक हिस्सा है। बच्चों को अपने जीवन में स्मार्ट और तार्किक निर्णय लेने की भी आवश्यकता होती है, यही कारण है कि हमें अपने बच्चों के बीच गणित की एक मजबूत नींव का निर्माण करना महत्वपूर्ण है। मुझे एहसास हुआ है कि गणित को पढ़ाने में पारंपरिक दृष्टिकोण बच्चों को इस विषय को समझने का प्र्याप्त स्पेस नहीं दे रहा है। इसके बजाए, अधिकांश बच्चों में इसको लेकर डर बढ़ता ही जा रहा है, जो कि निराशाजनक बात है। इसलिए, मैं बच्चों की मदद करने के लिए और उन्हें बताने के लिए एक रास्ता खोजना चाहता था जिसके माध्यम से उन्हें पता चल सके कि हमारे जीवन के हर पहलू में गणित कैसे प्रचलित है। यही कारण है कि मैंने क्यूमैथ शुरू किया। यह गणित को एक जीवन के कौशल के रूप में मानता है जो छात्रों को हमेशा-बदलने वाली दुनिया के माध्यम से नेविगेट करने में मदद करता है।’</span><dl id=”attachment_7408″ class=”wp-caption alignleft” style=”width: 251px;” data-mce-style=”width: 251px;”><dt class=”wp-caption-dt”><img class=” wp-image-7408″ src=”http://hindi.edinbox.com/wp-content/uploads/2018/05/PHOTO-INSPIRUS-1.jpg” alt=”” width=”251″ height=”170″ data-mce-src=”http://hindi.edinbox.com/wp-content/uploads/2018/05/PHOTO-INSPIRUS-1.jpg” /></dt><dd class=”wp-caption-dd”><span style=”color: #000000;” data-mce-style=”color: #000000;”>बख्तावर कृष्णन</span></dd></dl><span style=”color: #000000;” data-mce-style=”color: #000000;”>इंस्पेरस शिक्षा के संस्थापक और निदेशक बख्तावर कृष्णन ने गणित को आसान बनाने के लिए एक रोचकपूर्ण उपाय किया। वह कहते हैं, ‘गणित में जीवन के अधिकतम अनुप्रयोग हैं। मूलरूप से, इसे अधिक दिलचस्प बनाने के लिए दैनिक अनुप्रयोगों से संबंधित होना चाहिए। जब आप बाजार से कोई वस्तु खरीदने जाते हैं, तो आप वहां प्रतिशत और लाभ व हानि की अवधारणा का उपयोग कर सकते हैं। जब क्रिकेट के पहले दो कप्तान टॉस के लिए जाते हैं, तो वहां प्रायिकता की अवधारणा को पढ़ाया जा सकता है।’</span><span style=”color: #003366;” data-mce-style=”color: #003366;”>छात्र बोलते हैं</span><span style=”color: #000000;” data-mce-style=”color: #000000;”>हंसराज स्कूल के छात्र मेहर खिलवानी बताते हैं कि रैखिक समीकरण, बीजगणित, प्रतिशत, गणित, त्रिकोणमिति और ज्यामिति आदि हमारे लिए राक्षसों की तरह थे। जब तक हमें गणित से मुकाबला करने का कोई रास्ता नहीं मिला, तब तक हम गणित विषय से नफरत करते रहे। मैं गणित से अब भी बहुत नफरत करता हूं। यह मेरे लिए कभी आसान विषय नहीं रहा। मुझे उस समय तक सरल रैखिक समीकरणों या गणित की किसी अन्य समस्याओं को समझने के लिए जूझना पड़ा जब तक कि मेरे शिक्षक ने मुझे इससे मुकाबला करने का समाधान नहीं दिया। उन्होंने मुझे इंटरनेट पर इस विषय का अध्ययन करने के विभिन्न तरीकों की खोजने की सलाह दी। मैंने वही किया और उनकी मदद से मुझे धीरे-धीरे गणित विषय अच्छा लगने लगा। मेरे शिक्षक ने मेरे लिए कुछ असाइनमेंट तैयार किए जिन्होंने वास्तव में हमारी मदद की। अब, मैं गणित के अध्ययन में पहले से अधिक आत्मविश्वास महसूस करता हूं।</span><span style=”color: #000000;” data-mce-style=”color: #000000;”>देव समाज आधुनिक विद्यालय के छात्र देव मदान, गणित पर विशेष रूप से फोकस करते हैं। उन्होंने विषय को समझने के कई तरीकों का प्रयोग किया है और उन्हें बताया कि <strong>www-meritnation-com</strong> नामक मंच ने वास्तव में उसकी मदद की है। उन्होंने बताया, ‘इंटरनेट पर आरएंडडी के दौरान मुझे  <strong>meritnation.com</strong> वेबसाइट के बारे में मालूम हुआ जिसमें गणित की समस्याओं को हल करने के अनूठक तरीके दिये गये हैं। इस मंच पर कोई भी किसी से सवाल पूछ सकता है और उनका समाधान ढूंढ सकता है। इतना ही नहीं, गणित के भय से निपटने के लिए संगीत ने भी मेरे लिए एक महान चिकित्सक की भूमिका निभाई। अब, विषय का अध्ययन करते समय या अभ्यास करते समय, मैं हमेशा संगीत सुनता हूं, जो मुझे ध्यान केंद्रित करने में मदद करता है।’</span><strong><span style=”color: #003366;” data-mce-style=”color: #003366;”>सरकारी हस्तक्षेप</span></strong><span style=”color: #000000;” data-mce-style=”color: #000000;”><img class=”wp-image-7406 alignright” src=”http://hindi.edinbox.com/wp-content/uploads/2018/05/Mathematics-1-300×300.jpg” alt=”” width=”169″ height=”168″ data-mce-src=”http://hindi.edinbox.com/wp-content/uploads/2018/05/Mathematics-1-300×300.jpg” />सरकार भी गणित के लिए डर को कम करने में अपनी उचित भूमिका निभा रही है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एमएचआरडी) ने छात्रों के बीच गणित के डर को कम करने के लिए एक समिति गठित की है। गुजरात शिक्षा मंत्री भूपेंद्रसिंह की अध्यक्षता में, समिति गणित के शिक्षण को आसान बनाने के तरीकों का सुझाव देगी।</span><span style=”color: #000000;” data-mce-style=”color: #000000;”>मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने राष्ट्रीय शैक्षणिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की वार्षिक बैठक में घोषणा की थी कि इस समिति को बनाने का निर्णय राष्ट्रीय आकलन सर्वेक्षण के आधार पर छात्रों के गणित के भय को खत्म करने के लिए लिया गया था। उन्होंने कहा कि प्रतिष्ठित शिक्षाविद और वरिष्ठ अधिकारी इस समिति के कुछ हिस्से हैं।</span><span style=”color: #000000;” data-mce-style=”color: #000000;”>उन्होंने यह भी बताया, ‘तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री कद्याम श्रीहरि की अध्यक्षता में एक अन्य समिति की स्थापना की जाएगी, ताकि सेवा शिक्षकों के 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